Friday, May 22, 2009

विवश


न तोड़ सकता हूँ चाँद तारें,
न मोड़ सकता हूँ रुख़ बयार का,
कर सकता हूँ मैं बस प्रिये ,
तुझसे वादा प्यार का

माना मुझसे हैं और हसीं,
है उपलब्ध लुभावने प्रलोभन ,
आमीन होंगी हर ख्वाहिशें
,
सुख में व्यतीत हो जीवन

पर नही
दिखा
सकता मैं,
सपना सात समंदर पार का,
कर सकता हूँ मैं बस प्रिये
,
तुझसे वादा प्यार का


उधर हैं राहें खुशी की,
इधर है
कठिन
जीवन ,
वहां हमेशा हंसता चेहरा ,
यहाँ कभी आँखें नम

उधर
मिलेगा
प्रिये उपहार,
सोने के ताज का ,
इधर होगा तोहफा बस ,
बाँहों के हार का

अभी विवश पथिक हूँ ,
मंजिल की तलाश है ,
तुम अगर साथ हो तो ,
क्षितिज भी पास है

इच्छा तुम्हारी , निर्णय तुम्हारा,
अधिकार है इनकार का ,
कर सकता हूँ मैं बस प्रिये ,
तुझसे वादा प्यार का

----- Ajay Gautam ' आह़त '

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